आईटीआई मार्कशीट में संशोधन की प्रक्रिया (Step by Step)

आईटीआई में प्रवेश लेने वाले छात्र प्रायः प्रवेश फॉर्म भरते समय कुछ सामान्य लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण त्रुटियाँ कर बैठते हैं। ये त्रुटियाँ प्रारंभ में छोटी प्रतीत होती हैं, लेकिन आगे चलकर परीक्षा, परिणाम, मार्कशीट और प्रमाणपत्र से जुड़ी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती हैं।

प्रवेश फॉर्म में दी गई गलत जानकारी के कारण कई बार प्रवेश पत्र (Admit Card / Hall Ticket) में भी त्रुटिपूर्ण विवरण अंकित हो जाता है। यही गलत जानकारी परीक्षा के पश्चात जारी होने वाली मार्कशीट एवं प्रमाणपत्र (Certificate) में स्थायी रूप से दर्ज हो जाती है। परिणामस्वरूप, जब छात्र सरकारी या निजी क्षेत्र की नौकरियों के लिए आवेदन करते हैं, तो दस्तावेज़ों में मौजूद गलत विवरण उनकी पात्रता, सत्यापन (Verification) और चयन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

इसके अतिरिक्त, यदि छात्र आईटीआई के बाद उच्च शिक्षा (Diploma, B.Voc, CITS या अन्य कोर्स) में प्रवेश लेना चाहते हैं, तो वहाँ भी दस्तावेज़ों की त्रुटियों के कारण उन्हें प्रवेश में विलंब या अस्वीकृति जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कई मामलों में छात्रों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और संसाधनों की अनावश्यक हानि होती है।

इसी कारण छात्रों के लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि आईटीआई की मार्कशीट में संशोधन की अनुमति सीमित और नियमबद्ध होती है। आईटीआई प्रणाली के अंतर्गत केवल 8 प्रकार के संशोधन ही अनुमन्य (Permissible) होते हैं, और वे भी निर्धारित नियमों, समय-सीमा तथा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अंतर्गत ही किए जा सकते हैं।

अतः यह आवश्यक है कि छात्र प्रवेश के समय जानकारी भरते हुए पूर्ण सावधानी बरतें और यदि किसी प्रकार की त्रुटि हो जाए, तो समय रहते आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से अनुमन्य संशोधन करवाएँ, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की शैक्षणिक या व्यावसायिक बाधा से बचा जा सके।

मार्कशीट और सर्टिफिकेट में कौन-कौन से संशोधन संभव हैं?

मार्कशीट अथवा प्रमाण पत्र में किसी भी प्रकार का संशोधन कराने के लिए परीक्षार्थी को अनिवार्य रूप से Profile Related Grievance दर्ज करनी होगी। क्योंकि प्रोफाइल से संबंधित Grievance के माध्यम से ही मार्कशीट एवं प्रमाण पत्र में आवश्यक सुधार या संशोधन की प्रक्रिया संपन्न की जाती है।

📌 छात्र के नाम (Name) में संशोधन करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

यदि किसी छात्र को आईटीआई की मार्कशीट एवं प्रमाण पत्र में अपने नाम में संशोधन कराना है, तो परीक्षार्थी को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार Profile Related Grievance अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। इसी माध्यम से संबंधित दस्तावेज़ों में नाम सुधार की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से की जाती है।

Step - 1

डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग एक तीन वर्षीय तकनीकी शिक्षा कार्यक्रम है, जिसे आईटीआई के बाद छात्रों द्वारा सबसे अधिक चुना जाने वाला उच्च शिक्षा विकल्प माना जाता है। यह कोर्स छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी कौशल और इंडस्ट्री-रेडी ट्रेनिंग प्रदान करता है, जिससे वे तकनीकी क्षेत्र में सशक्त करियर बना सकें।

यह कोर्स 10वीं + आईटीआई उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त है। कई राज्यों में आईटीआई पास छात्रों को लेटरल एंट्री के माध्यम से सीधे द्वितीय वर्ष में प्रवेश की सुविधा भी दी जाती है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है।

डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग के अंतर्गत Electrical, Mechanical, Civil, Computer, Electronics तथा Automobile Engineering जैसी प्रमुख और मांग वाली ब्रांच उपलब्ध हैं।

इस कोर्स को पूरा करने के बाद छात्र Junior Engineer (JE) जैसे पदों पर सरकारी एवं निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, डिप्लोमा के बाद B.Tech में लेटरल एंट्री के माध्यम से उच्च शिक्षा का मार्ग भी खुलता है, जिससे करियर में और अधिक उन्नति संभव होती है।

1️⃣ उच्च शिक्षा के अवसर

आईटीआई के बाद छात्र डिप्लोमा (Engineering/Technology), एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स, शॉर्ट-टर्म स्किल कोर्स एवं अन्य तकनीकी शिक्षा विकल्पों के माध्यम से अपनी योग्यता को और मजबूत कर सकते हैं।

1️⃣ उच्च शिक्षा के अवसर

आईटीआई के बाद छात्र डिप्लोमा (Engineering/Technology), एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स, शॉर्ट-टर्म स्किल कोर्स एवं अन्य तकनीकी शिक्षा विकल्पों के माध्यम से अपनी योग्यता को और मजबूत कर सकते हैं।

1️⃣ उच्च शिक्षा के अवसर

आईटीआई के बाद छात्र डिप्लोमा (Engineering/Technology), एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स, शॉर्ट-टर्म स्किल कोर्स एवं अन्य तकनीकी शिक्षा विकल्पों के माध्यम से अपनी योग्यता को और मजबूत कर सकते हैं।

1️⃣ उच्च शिक्षा के अवसर

आईटीआई के बाद छात्र डिप्लोमा (Engineering/Technology), एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स, शॉर्ट-टर्म स्किल कोर्स एवं अन्य तकनीकी शिक्षा विकल्पों के माध्यम से अपनी योग्यता को और मजबूत कर सकते हैं।

1️⃣ उच्च शिक्षा के अवसर

आईटीआई के बाद छात्र डिप्लोमा (Engineering/Technology), एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स, शॉर्ट-टर्म स्किल कोर्स एवं अन्य तकनीकी शिक्षा विकल्पों के माध्यम से अपनी योग्यता को और मजबूत कर सकते हैं।

1️⃣ उच्च शिक्षा के अवसर

आईटीआई के बाद छात्र डिप्लोमा (Engineering/Technology), एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स, शॉर्ट-टर्म स्किल कोर्स एवं अन्य तकनीकी शिक्षा विकल्पों के माध्यम से अपनी योग्यता को और मजबूत कर सकते हैं।

1️⃣ उच्च शिक्षा के अवसर

आईटीआई के बाद छात्र डिप्लोमा (Engineering/Technology), एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स, शॉर्ट-टर्म स्किल कोर्स एवं अन्य तकनीकी शिक्षा विकल्पों के माध्यम से अपनी योग्यता को और मजबूत कर सकते हैं।

1️⃣ उच्च शिक्षा के अवसर

आईटीआई के बाद छात्र डिप्लोमा (Engineering/Technology), एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स, शॉर्ट-टर्म स्किल कोर्स एवं अन्य तकनीकी शिक्षा विकल्पों के माध्यम से अपनी योग्यता को और मजबूत कर सकते हैं।

छात्र के Result में कौन-कौन से संशोधन संभव हैं?

📌 छात्र के प्रयोगात्मक परीक्षा (Practical Exam) के अंको में संशोधन करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

1️⃣ उच्च शिक्षा के अवसर

आईटीआई के बाद छात्र डिप्लोमा (Engineering/Technology), एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स, शॉर्ट-टर्म स्किल कोर्स एवं अन्य तकनीकी शिक्षा विकल्पों के माध्यम से अपनी योग्यता को और मजबूत कर सकते हैं।

डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग (Polytechnic Diploma)

डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग एक तीन वर्षीय तकनीकी शिक्षा कार्यक्रम है, जिसे आईटीआई के बाद छात्रों द्वारा सबसे अधिक चुना जाने वाला उच्च शिक्षा विकल्प माना जाता है। यह कोर्स छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी कौशल और इंडस्ट्री-रेडी ट्रेनिंग प्रदान करता है, जिससे वे तकनीकी क्षेत्र में सशक्त करियर बना सकें।

यह कोर्स 10वीं + आईटीआई उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त है। कई राज्यों में आईटीआई पास छात्रों को लेटरल एंट्री के माध्यम से सीधे द्वितीय वर्ष में प्रवेश की सुविधा भी दी जाती है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है।

डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग के अंतर्गत Electrical, Mechanical, Civil, Computer, Electronics तथा Automobile Engineering जैसी प्रमुख और मांग वाली ब्रांच उपलब्ध हैं।

इस कोर्स को पूरा करने के बाद छात्र Junior Engineer (JE) जैसे पदों पर सरकारी एवं निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, डिप्लोमा के बाद B.Tech में लेटरल एंट्री के माध्यम से उच्च शिक्षा का मार्ग भी खुलता है, जिससे करियर में और अधिक उन्नति संभव होती है।

एडवांस डिप्लोमा / एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स

एडवांस डिप्लोमा एवं एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स 1 से 2 वर्ष की अवधि के स्किल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम होते हैं, जो आईटीआई के बाद छात्रों को विशेष तकनीकी विशेषज्ञता (Specialization) प्रदान करते हैं। ये कोर्स विशेष रूप से इंडस्ट्री की वर्तमान जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाते हैं, जिससे छात्र तेजी से रोजगार के लिए तैयार हो सकें।

इन कोर्सों के अंतर्गत Advanced CNC Machining, Industrial Automation, Mechatronics, Solar Technician, Advanced Refrigeration & Air Conditioning, तथा PLC & SCADA जैसे आधुनिक और हाई-डिमांड क्षेत्र शामिल होते हैं। यह सभी क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे उद्योगों से जुड़े हैं, जहाँ कुशल तकनीशियनों की निरंतर मांग बनी रहती है।

एडवांस डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स करने के बाद छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स, आधुनिक मशीनों व तकनीकों पर काम करने का अनुभव तथा कम समय में रोजगार प्राप्त करने का अवसर मिलता है। विशेष रूप से प्राइवेट सेक्टर में इन कोर्सों की उच्च मांग (High Demand) होने के कारण करियर की शुरुआत मजबूत और स्थिर बनती है।

डिप्लोमा इन वोकेशनल एजुकेशन (D.Voc)

डिप्लोमा इन वोकेशनल एजुकेशन (D.Voc) एक स्किल और थ्योरी आधारित व्यावसायिक डिप्लोमा कार्यक्रम है, जिसे NSQF (National Skills Qualifications Framework) के अनुसार डिजाइन किया गया है। यह कोर्स छात्रों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और इंडस्ट्री एक्सपोज़र प्रदान करता है, जिससे वे रोजगार के लिए अधिक सक्षम बनते हैं।

D.Voc की कुल अवधि 3 वर्ष होती है, जिसमें चरणबद्ध रूप से Certificate → Diploma → Advanced Diploma का ढांचा अपनाया जाता है। इस संरचना के कारण छात्र पढ़ाई के साथ-साथ कार्य अनुभव (On-the-Job Training) भी प्राप्त करते हैं।

इस कोर्स के अंतर्गत Automotive, Electrical, Construction, IT/Hardware, Retail एवं Logistics जैसे महत्वपूर्ण और रोजगारोन्मुखी सेक्टर शामिल हैं, जो वर्तमान उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप हैं।

D.Voc करने के बाद छात्रों को पढ़ाई के साथ काम करने का अनुभव, इंडस्ट्री-लिंक्ड ट्रेनिंग, तथा रोजगार के बेहतर अवसर मिलते हैं। इसके अतिरिक्त, D.Voc पूरा करने के बाद B.Voc (Bachelor of Vocational Education) में आगे की पढ़ाई का विकल्प भी उपलब्ध होता है, जिससे करियर में दीर्घकालीन विकास संभव होता है।

बैचलर ऑफ वोकेशन (B.Voc)

बैचलर ऑफ वोकेशन (B.Voc) एक तीन वर्षीय डिग्री कार्यक्रम है, जो आईटीआई के बाद उच्च शिक्षा के लिए एक मजबूत और करियर-ओरिएंटेड विकल्प माना जाता है। यह कोर्स पारंपरिक डिग्री के साथ-साथ इंडस्ट्री-आधारित स्किल डेवलपमेंट पर विशेष जोर देता है, जिससे छात्र तकनीकी और व्यावसायिक दोनों स्तरों पर सक्षम बनते हैं।

B.Voc की अवधि 3 वर्ष होती है और इसमें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट व इंडस्ट्रियल एक्सपोज़र शामिल होता है। इस कारण यह कोर्स रोजगार की दृष्टि से अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

इस डिग्री के अंतर्गत Electrical Technology, Automobile, Manufacturing, IT / Software तथा Construction जैसी लोकप्रिय और इंडस्ट्री-डिमांडेड स्पेशलाइजेशन उपलब्ध हैं, जो विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में करियर की मजबूत नींव तैयार करती हैं।

B.Voc करने के बाद छात्रों को डिग्री + स्किल का लाभ मिलता है, जिससे उन्हें प्राइवेट सेक्टर में बेहतर पहचान और स्थिर करियर के अवसर प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही, अनुभव और कौशल के आधार पर सुपरवाइजर, कोऑर्डिनेटर एवं मैनेजमेंट-लेवल जॉब्स तक पहुँचने के अवसर भी खुलते हैं।

ओपन / डिस्टेंस एजुकेशन (Open Learning)

ओपन या डिस्टेंस एजुकेशन उन छात्रों के लिए एक लचीला और सुविधाजनक शिक्षा विकल्प है, जो नौकरी कर रहे हैं या किसी कारणवश नियमित कॉलेज में उपस्थित नहीं हो सकते। यह प्रणाली विद्यार्थियों को समय और स्थान की स्वतंत्रता के साथ पढ़ाई जारी रखने का अवसर प्रदान करती है।

इस माध्यम से छात्र IGNOU (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय) एवं विभिन्न State Open Universities के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकते हैं। ये संस्थान सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होते हैं और देशभर में इनकी डिग्री एवं डिप्लोमा स्वीकार्य हैं।

ओपन लर्निंग के अंतर्गत Technical Certificate, Skill Diploma तथा विभिन्न Vocational Programs उपलब्ध होते हैं, जो कार्यरत छात्रों के लिए स्किल अपग्रेडेशन और करियर ग्रोथ में सहायक होते हैं।

ओपन / डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से छात्र जॉब के साथ पढ़ाई, अपनी योग्यता में वृद्धि और बेहतर करियर अवसर प्राप्त कर सकते हैं, बिना नियमित कक्षा में उपस्थित हुए।

2️⃣ अप्रेंटिसशिप (Apprenticeship)

अप्रेंटिसशिप के माध्यम से छात्र इंडस्ट्री में व्यावहारिक अनुभव, मासिक स्टाइपेंड और भविष्य में स्थायी रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

अप्रेंटिसशिप + पार्ट-टाइम स्टडी

अप्रेंटिसशिप के साथ पार्ट-टाइम स्टडी एक व्यावहारिक और करियर-फोकस्ड विकल्प है, जिसमें छात्र काम करते हुए पढ़ाई जारी रख सकते हैं। इस मॉडल में विद्यार्थी किसी उद्योग या संस्था में अप्रेंटिस के रूप में कार्य करते हैं और साथ-साथ अपनी शैक्षणिक योग्यता को आगे बढ़ाते हैं।

इस विकल्प के अंतर्गत छात्र Distance / Open Learning या Evening Diploma एवं Certificate Courses के माध्यम से पढ़ाई कर सकते हैं। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है जो आर्थिक कारणों से फुल-टाइम पढ़ाई नहीं कर पाते, लेकिन उच्च शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट दोनों जारी रखना चाहते हैं।

अप्रेंटिसशिप के साथ पढ़ाई करने से छात्रों को कमाई के साथ पढ़ाई का अवसर, वास्तविक इंडस्ट्री एक्सपीरियंस, तथा आत्मनिर्भर बनने के लिए आवश्यक फाइनेंशियल सपोर्ट मिलता है। साथ ही, कार्य अनुभव के कारण नौकरी के समय उनकी प्रोफाइल अधिक मजबूत बनती है और रोजगार की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।

3️⃣ रोजगार के अवसर

आईटीआई पास छात्रों के लिए सरकारी, अर्ध-सरकारी एवं निजी क्षेत्र में विभिन्न तकनीकी पदों पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं। नौकरी खोजे Click here

4️⃣ स्वरोज़गार एवं उद्यमिता

तकनीकी ज्ञान के आधार पर छात्र स्वरोज़गार, सर्विस सेंटर, वर्कशॉप, फ्रीलांस टेक्निकल सर्विस आदि शुरू कर सकते हैं।

आईटीआई पूरा करने के बाद यह सवाल हर छात्र के मन में आता है कि अब आगे कौन-सा रास्ता चुना जाए, जिससे एक स्थिर, सुरक्षित और उज्ज्वल करियर बनाया जा सके। 

🔹 आईटीआई के बाद सही निर्णय लेने के लाभ (Advantages)

आईटीआई पूर्ण करने के बाद लिया गया सही और समय पर निर्णय छात्र के करियर, आय और भविष्य की स्थिरता को सीधे प्रभावित करता है। उचित मार्गदर्शन के साथ चुना गया करियर पथ न केवल बेहतर अवसर प्रदान करता है, बल्कि दीर्घकालीन सफलता की नींव भी रखता है।

आईटीआई के बाद सही निर्णय लेने के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  • बेहतर करियर दिशा – स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने से भटकाव से बचाव होता है।

  • उच्च वेतन और ग्रोथ के अवसर – सही विकल्प से आय और प्रमोशन की संभावनाएँ बढ़ती हैं।

  • तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल में वृद्धि – उच्च शिक्षा या विशेष प्रशिक्षण से विशेषज्ञता विकसित होती है।

  • सरकारी और निजी क्षेत्र में बेहतर अवसर – सही योग्यता से दोनों क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएँ खुलती हैं।

  • आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास – करियर को लेकर स्पष्टता होने से आत्मविश्वास बढ़ता है।

  • दीर्घकालीन स्थिरता और सुरक्षा – योजनाबद्ध करियर से भविष्य अधिक सुरक्षित होता है।

संक्षेप में, आईटीआई के बाद लिया गया सही निर्णय केवल अगला कदम नहीं, बल्कि उज्ज्वल और सफल भविष्य की मजबूत नींव होता है।

1️⃣ उच्च शिक्षा के अवसर

आईटीआई के बाद छात्र डिप्लोमा (Engineering/Technology), एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स, शॉर्ट-टर्म स्किल कोर्स एवं अन्य तकनीकी शिक्षा विकल्पों के माध्यम से अपनी योग्यता को और मजबूत कर सकते हैं।

डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग (Polytechnic Diploma)

डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग एक तीन वर्षीय तकनीकी शिक्षा कार्यक्रम है, जिसे आईटीआई के बाद छात्रों द्वारा सबसे अधिक चुना जाने वाला उच्च शिक्षा विकल्प माना जाता है। यह कोर्स छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी कौशल और इंडस्ट्री-रेडी ट्रेनिंग प्रदान करता है, जिससे वे तकनीकी क्षेत्र में सशक्त करियर बना सकें।

यह कोर्स 10वीं + आईटीआई उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त है। कई राज्यों में आईटीआई पास छात्रों को लेटरल एंट्री के माध्यम से सीधे द्वितीय वर्ष में प्रवेश की सुविधा भी दी जाती है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है।

डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग के अंतर्गत Electrical, Mechanical, Civil, Computer, Electronics तथा Automobile Engineering जैसी प्रमुख और मांग वाली ब्रांच उपलब्ध हैं।

इस कोर्स को पूरा करने के बाद छात्र Junior Engineer (JE) जैसे पदों पर सरकारी एवं निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, डिप्लोमा के बाद B.Tech में लेटरल एंट्री के माध्यम से उच्च शिक्षा का मार्ग भी खुलता है, जिससे करियर में और अधिक उन्नति संभव होती है।

एडवांस डिप्लोमा / एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स

एडवांस डिप्लोमा एवं एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स 1 से 2 वर्ष की अवधि के स्किल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम होते हैं, जो आईटीआई के बाद छात्रों को विशेष तकनीकी विशेषज्ञता (Specialization) प्रदान करते हैं। ये कोर्स विशेष रूप से इंडस्ट्री की वर्तमान जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाते हैं, जिससे छात्र तेजी से रोजगार के लिए तैयार हो सकें।

इन कोर्सों के अंतर्गत Advanced CNC Machining, Industrial Automation, Mechatronics, Solar Technician, Advanced Refrigeration & Air Conditioning, तथा PLC & SCADA जैसे आधुनिक और हाई-डिमांड क्षेत्र शामिल होते हैं। यह सभी क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे उद्योगों से जुड़े हैं, जहाँ कुशल तकनीशियनों की निरंतर मांग बनी रहती है।

एडवांस डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स करने के बाद छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स, आधुनिक मशीनों व तकनीकों पर काम करने का अनुभव तथा कम समय में रोजगार प्राप्त करने का अवसर मिलता है। विशेष रूप से प्राइवेट सेक्टर में इन कोर्सों की उच्च मांग (High Demand) होने के कारण करियर की शुरुआत मजबूत और स्थिर बनती है।

डिप्लोमा इन वोकेशनल एजुकेशन (D.Voc)

डिप्लोमा इन वोकेशनल एजुकेशन (D.Voc) एक स्किल और थ्योरी आधारित व्यावसायिक डिप्लोमा कार्यक्रम है, जिसे NSQF (National Skills Qualifications Framework) के अनुसार डिजाइन किया गया है। यह कोर्स छात्रों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और इंडस्ट्री एक्सपोज़र प्रदान करता है, जिससे वे रोजगार के लिए अधिक सक्षम बनते हैं।

D.Voc की कुल अवधि 3 वर्ष होती है, जिसमें चरणबद्ध रूप से Certificate → Diploma → Advanced Diploma का ढांचा अपनाया जाता है। इस संरचना के कारण छात्र पढ़ाई के साथ-साथ कार्य अनुभव (On-the-Job Training) भी प्राप्त करते हैं।

इस कोर्स के अंतर्गत Automotive, Electrical, Construction, IT/Hardware, Retail एवं Logistics जैसे महत्वपूर्ण और रोजगारोन्मुखी सेक्टर शामिल हैं, जो वर्तमान उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप हैं।

D.Voc करने के बाद छात्रों को पढ़ाई के साथ काम करने का अनुभव, इंडस्ट्री-लिंक्ड ट्रेनिंग, तथा रोजगार के बेहतर अवसर मिलते हैं। इसके अतिरिक्त, D.Voc पूरा करने के बाद B.Voc (Bachelor of Vocational Education) में आगे की पढ़ाई का विकल्प भी उपलब्ध होता है, जिससे करियर में दीर्घकालीन विकास संभव होता है।

बैचलर ऑफ वोकेशन (B.Voc)

बैचलर ऑफ वोकेशन (B.Voc) एक तीन वर्षीय डिग्री कार्यक्रम है, जो आईटीआई के बाद उच्च शिक्षा के लिए एक मजबूत और करियर-ओरिएंटेड विकल्प माना जाता है। यह कोर्स पारंपरिक डिग्री के साथ-साथ इंडस्ट्री-आधारित स्किल डेवलपमेंट पर विशेष जोर देता है, जिससे छात्र तकनीकी और व्यावसायिक दोनों स्तरों पर सक्षम बनते हैं।

B.Voc की अवधि 3 वर्ष होती है और इसमें थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट व इंडस्ट्रियल एक्सपोज़र शामिल होता है। इस कारण यह कोर्स रोजगार की दृष्टि से अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

इस डिग्री के अंतर्गत Electrical Technology, Automobile, Manufacturing, IT / Software तथा Construction जैसी लोकप्रिय और इंडस्ट्री-डिमांडेड स्पेशलाइजेशन उपलब्ध हैं, जो विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में करियर की मजबूत नींव तैयार करती हैं।

B.Voc करने के बाद छात्रों को डिग्री + स्किल का लाभ मिलता है, जिससे उन्हें प्राइवेट सेक्टर में बेहतर पहचान और स्थिर करियर के अवसर प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही, अनुभव और कौशल के आधार पर सुपरवाइजर, कोऑर्डिनेटर एवं मैनेजमेंट-लेवल जॉब्स तक पहुँचने के अवसर भी खुलते हैं।

ओपन / डिस्टेंस एजुकेशन (Open Learning)

ओपन या डिस्टेंस एजुकेशन उन छात्रों के लिए एक लचीला और सुविधाजनक शिक्षा विकल्प है, जो नौकरी कर रहे हैं या किसी कारणवश नियमित कॉलेज में उपस्थित नहीं हो सकते। यह प्रणाली विद्यार्थियों को समय और स्थान की स्वतंत्रता के साथ पढ़ाई जारी रखने का अवसर प्रदान करती है।

इस माध्यम से छात्र IGNOU (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय) एवं विभिन्न State Open Universities के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकते हैं। ये संस्थान सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होते हैं और देशभर में इनकी डिग्री एवं डिप्लोमा स्वीकार्य हैं।

ओपन लर्निंग के अंतर्गत Technical Certificate, Skill Diploma तथा विभिन्न Vocational Programs उपलब्ध होते हैं, जो कार्यरत छात्रों के लिए स्किल अपग्रेडेशन और करियर ग्रोथ में सहायक होते हैं।

ओपन / डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से छात्र जॉब के साथ पढ़ाई, अपनी योग्यता में वृद्धि और बेहतर करियर अवसर प्राप्त कर सकते हैं, बिना नियमित कक्षा में उपस्थित हुए।

2️⃣ अप्रेंटिसशिप (Apprenticeship)

अप्रेंटिसशिप के माध्यम से छात्र इंडस्ट्री में व्यावहारिक अनुभव, मासिक स्टाइपेंड और भविष्य में स्थायी रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

अप्रेंटिसशिप + पार्ट-टाइम स्टडी

अप्रेंटिसशिप के साथ पार्ट-टाइम स्टडी एक व्यावहारिक और करियर-फोकस्ड विकल्प है, जिसमें छात्र काम करते हुए पढ़ाई जारी रख सकते हैं। इस मॉडल में विद्यार्थी किसी उद्योग या संस्था में अप्रेंटिस के रूप में कार्य करते हैं और साथ-साथ अपनी शैक्षणिक योग्यता को आगे बढ़ाते हैं।

इस विकल्प के अंतर्गत छात्र Distance / Open Learning या Evening Diploma एवं Certificate Courses के माध्यम से पढ़ाई कर सकते हैं। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है जो आर्थिक कारणों से फुल-टाइम पढ़ाई नहीं कर पाते, लेकिन उच्च शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट दोनों जारी रखना चाहते हैं।

अप्रेंटिसशिप के साथ पढ़ाई करने से छात्रों को कमाई के साथ पढ़ाई का अवसर, वास्तविक इंडस्ट्री एक्सपीरियंस, तथा आत्मनिर्भर बनने के लिए आवश्यक फाइनेंशियल सपोर्ट मिलता है। साथ ही, कार्य अनुभव के कारण नौकरी के समय उनकी प्रोफाइल अधिक मजबूत बनती है और रोजगार की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।

3️⃣ रोजगार के अवसर

आईटीआई पास छात्रों के लिए सरकारी, अर्ध-सरकारी एवं निजी क्षेत्र में विभिन्न तकनीकी पदों पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं। नौकरी खोजे Click here

4️⃣ स्वरोज़गार एवं उद्यमिता

तकनीकी ज्ञान के आधार पर छात्र स्वरोज़गार, सर्विस सेंटर, वर्कशॉप, फ्रीलांस टेक्निकल सर्विस आदि शुरू कर सकते हैं।

आईटीआई पूरा करने के बाद यह सवाल हर छात्र के मन में आता है कि अब आगे कौन-सा रास्ता चुना जाए, जिससे एक स्थिर, सुरक्षित और उज्ज्वल करियर बनाया जा सके। 

🔹 आईटीआई के बाद सही निर्णय लेने के लाभ (Advantages)

आईटीआई पूर्ण करने के बाद लिया गया सही और समय पर निर्णय छात्र के करियर, आय और भविष्य की स्थिरता को सीधे प्रभावित करता है। उचित मार्गदर्शन के साथ चुना गया करियर पथ न केवल बेहतर अवसर प्रदान करता है, बल्कि दीर्घकालीन सफलता की नींव भी रखता है।

आईटीआई के बाद सही निर्णय लेने के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  • बेहतर करियर दिशा – स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने से भटकाव से बचाव होता है।

  • उच्च वेतन और ग्रोथ के अवसर – सही विकल्प से आय और प्रमोशन की संभावनाएँ बढ़ती हैं।

  • तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल में वृद्धि – उच्च शिक्षा या विशेष प्रशिक्षण से विशेषज्ञता विकसित होती है।

  • सरकारी और निजी क्षेत्र में बेहतर अवसर – सही योग्यता से दोनों क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएँ खुलती हैं।

  • आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास – करियर को लेकर स्पष्टता होने से आत्मविश्वास बढ़ता है।

  • दीर्घकालीन स्थिरता और सुरक्षा – योजनाबद्ध करियर से भविष्य अधिक सुरक्षित होता है।

संक्षेप में, आईटीआई के बाद लिया गया सही निर्णय केवल अगला कदम नहीं, बल्कि उज्ज्वल और सफल भविष्य की मजबूत नींव होता है।

छात्रों को अपने नाम में संशोधन कराने के लिए Profile से संबंधित Grievance दर्ज करनी होगी। इसके लिए छात्र को SIDH पोर्टल पर अपने व्यक्तिगत लॉगिन के माध्यम से आवेदन करना अनिवार्य है। नाम संशोधन के लिए दस्तावेज़ों के रूप में छात्र को मुख्य रूप से कक्षा 10वीं की अंकसूची (Marksheet) अपलोड करनी होगी। इसके अतिरिक्त, सत्यापन प्रक्रिया को पूर्ण करने हेतु आईटीआई की अंकसूची (Marksheet) एवं प्रमाण पत्र भी आवश्यक होंगे।

▣ छात्र के नाम में संशोधन:

छात्रों को अपने नाम में संशोधन कराने के लिए Profile से संबंधित Grievance दर्ज करनी होगी। इसके लिए छात्र को SIDH पोर्टल पर अपने व्यक्तिगत लॉगिन के माध्यम से आवेदन करना अनिवार्य है। नाम संशोधन के लिए दस्तावेज़ों के रूप में छात्र को मुख्य रूप से कक्षा 10वीं की अंकसूची (Marksheet) अपलोड करनी होगी। इसके अतिरिक्त, सत्यापन प्रक्रिया को पूर्ण करने हेतु आईटीआई की अंकसूची (Marksheet) एवं प्रमाण पत्र भी आवश्यक होंगे।
छात्रों को अपने जेंडर में संशोधन कराने हेतु प्रोफाइल से संबंधित Grievance दर्ज करनी होगी। इसके लिए छात्र को SIDH पोर्टल पर अपने व्यक्तिगत लॉगिन से आवेदन करना अनिवार्य है। जेंडर संशोधन के लिए नाम व जेंडर अंकित सरकारी दस्तावेज, जैसे जन्म प्रमाण पत्र या शपथ पत्र (जिसमें फोटो, नाम व जन्मतिथि स्पष्ट हो), अपलोड करना होगा। साथ ही आईटीआई की अंकसूची एवं प्रमाण पत्र सत्यापन हेतु आवश्यक होंगे। निर्धारित प्रक्रिया अनुसार।

▣ छात्र के लिंग (Gender) में संशोधन:

छात्रों को अपने जेंडर में संशोधन कराने हेतु प्रोफाइल से संबंधित Grievance दर्ज करनी होगी। इसके लिए छात्र को SIDH पोर्टल पर अपने व्यक्तिगत लॉगिन से आवेदन करना अनिवार्य है। जेंडर संशोधन के लिए नाम व जेंडर अंकित सरकारी दस्तावेज, जैसे जन्म प्रमाण पत्र या शपथ पत्र (जिसमें फोटो, नाम व जन्मतिथि स्पष्ट हो), अपलोड करना होगा। साथ ही आईटीआई की अंकसूची एवं प्रमाण पत्र सत्यापन हेतु आवश्यक होंगे। निर्धारित प्रक्रिया अनुसार।
छात्रों को अपने जन्रमतिथि में संशोधन कराने हेतु प्रोफाइल से संबंधित Grievance दर्ज करनी होगी। इसके लिए छात्र को SIDH पोर्टल पर अपने व्यक्तिगत लॉगिन से आवेदन करना अनिवार्य है। जन्रमतिथि संशोधन के लिए नाम व जन्रमतिथि अंकित सरकारी दस्तावेज, जैसे जन्म प्रमाण पत्र या कक्षा 10वीं की अंकसूची (Marksheet), अपलोड करना होगा। साथ ही आईटीआई की अंकसूची एवं प्रमाण पत्र सत्यापन हेतु आवश्यक होंगे। निर्धारित प्रक्रिया अनुसार।

▣ छात्र की जन्मतिथि में संशोधन:

छात्रों को अपने जन्रमतिथि में संशोधन कराने हेतु प्रोफाइल से संबंधित Grievance दर्ज करनी होगी। इसके लिए छात्र को SIDH पोर्टल पर अपने व्यक्तिगत लॉगिन से आवेदन करना अनिवार्य है। जन्रमतिथि संशोधन के लिए नाम व जन्रमतिथि अंकित सरकारी दस्तावेज, जैसे जन्म प्रमाण पत्र या कक्षा 10वीं की अंकसूची (Marksheet), अपलोड करना होगा। साथ ही आईटीआई की अंकसूची एवं प्रमाण पत्र सत्यापन हेतु आवश्यक होंगे। निर्धारित प्रक्रिया अनुसार।
छात्रों को अपने फोटो में संशोधन कराने हेतु प्रोफाइल से संबंधित Grievance दर्ज करनी होगी। Non आधार ट्रेनी होने की स्थिति में आवेदन आवश्यक है जिसके लिए SIDH पोर्टल पर व्यक्तिगत लॉगिन से आवेदन अनिवार्य है, जबकि आधार ट्रेनी को केवल eKYC करना होगा, जिससे फोटो स्वतः अपडेट हो जाएगा। फोटो संशोधन हेतु नाम व फोटो युक्त शपथ पत्र तथा आईटीआई की अंकसूची एवं प्रमाण पत्र सत्यापन हेतु आवश्यक होंगे। निर्धारित प्रक्रिया अनुसार।

▣ छात्र के फोटो में संशोधन:

छात्रों को अपने फोटो में संशोधन कराने हेतु प्रोफाइल से संबंधित Grievance दर्ज करनी होगी। Non आधार ट्रेनी होने की स्थिति में आवेदन आवश्यक है जिसके लिए SIDH पोर्टल पर व्यक्तिगत लॉगिन से आवेदन अनिवार्य है, जबकि आधार ट्रेनी को केवल eKYC करना होगा, जिससे फोटो स्वतः अपडेट हो जाएगा। फोटो संशोधन हेतु नाम व फोटो युक्त शपथ पत्र तथा आईटीआई की अंकसूची एवं प्रमाण पत्र सत्यापन हेतु आवश्यक होंगे। निर्धारित प्रक्रिया अनुसार।
Category B

▣ छात्र के Mobile Number में संशोधन:

Category B
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▣ पिता के नाम में संशोधन:

Category B
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▣ माता के नाम में संशोधन:​

Category B
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▣ केटेगरी (जाती) के नाम में संशोधन:​

Category B
Category B

▣ छात्र के Email Id में संशोधन:

Category B

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